लांडग्यांना दुष्ट का म्हणतात?
| लेखक : | क्वेन्तँ ग्रेबाँ |
|---|---|
| अनुवादक : | प्रणव सखदेव |
| चित्रकार : | क्वेन्तँ ग्रेबाँ |
| पाने : | 24 |
| आवृत्ती : | नवीन आवृत्ती 2026 |
| पुनर्मुद्रण : | तिसरे पुनर्मुद्रण २०२३ |
| ISBN: | 978-81-7925-271-0 |
₹125.00
About the book
वयोगट ५ +
ही गोष्ट आहे एका गरीब बिचा-या लांडग्याची. एक होता लांडगा.
दुष्टबिष्ट नव्हता, साधाच होता बिचारा. तो एकदा सहज म्हणून एका कोकराशी बोलायला गेला.
पण त्याचे टोकदार सुळे पाहून कोकरू घाबरलं आणि पळत सुटलं…









