आणि घोरणं थांबलं…
| अनुवाद : | सुमित्रा आष्टीकर |
|---|---|
| चित्रकार : | निखिल खत्री |
| पाने : | 20 |
| आवृत्ती : | पहिली आवृत्ती |
| आकार : | 8.5 x 10.5 |
| ISBN: | 978-81-993899-8-4 |
₹110.00
About the book
घुर्र… खुर्र… घुर्र… या बंद खोलीत
एवढ्या मोठमोठ्याने कोण घोरतंय?
कोणाला काही कळेना. सगळेच प्राणी हैराण झाले.
पुस्तक वाचा आणि तुम्हीही शोधा कोण झोपलंय ते!









